Tuesday, 27 November 2012

क्रांति गीत -1

हम तो लड़ेंगे ,हम न डरेंगे ,
हम तो लड़ेंगे ,हम न डरेंगे ,



ये हाहाकार अत्याचार हम न सहेंगे ,
जहाँ हक न मिले तेरा मेरा वहीँ लड़ेंगे ,
हम तो लड़ेंगे ,हम न डरेंगे .....




जिन रगों में खून था उनमें भर लो बिजलियाँ  ,
इन बिजलियों से खाक कर दो सोने की वो बस्तियां ,
इस ख़ाक से फूटेगा अपनी जिंदगी का फूल ,
फिर महकेगी जिंदगी होगा न कोई शूल ,
हम तो लड़ेंगे ,हम न डरेंगे ....



एक से कदम है यारा एक कदमताल ,
एक सी आवाज अपनी एक सा अंदाज़ ,
हम जोर से जो थाप दें तो तख़्त हिलेगा ,
फिर गरजेगी धरती आकाश हिलेगा ,
हम तो लड़ेंगे ,हम न डरेंगे ...

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