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Wednesday, 7 May 2014

परिषद् व् युवा संस्कार शिविर


प्रिय साथी,
        लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी एवं शिक्षा व्यवस्था में फीस वृद्धि  को लेकर पटना (बिहार) से छात्र आंदोलन  की शुरुआत हुई जो एक व्यापक जनआंदोलन बना। उसी दरमियान जे0पी0 ने सम्पूर्ण क्रान्ति का आहवान किया और छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी (छायुसंवा)  को सम्पूर्ण क्रान्ति विचारधारा के वाहक के रूप में बनाया जो लगातार उसी दिशा में काम करती आ रही है। पिछले कई वर्षों से छायुसंवा ‘शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ एवं गुणवत्तायुक्त समान शिक्षा’ के लिए पूरे देश में जनचेतना का कार्यक्रम चलाते आ रही है और समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के लिये प्रयासरत हैं|
 जैसा की ज्ञात है कि नियमानुसार छायुसंवा कि हर वर्ष परिषद् (जिसमें नई कार्यकारणी का गठन किया जाता है ) आयोजित होती है| परन्तु 30 जून 2012 को हरिहर नाथ शास्त्री भवन,कानपुर में आयोजित व्यापक बैठक में छायुसंवा के संविधान अनुसार रिपोर्ट न मिलने के कारण पुरानी समिति को भंग कर पुनः केंद्रीय संचालन समिति बनाने का निर्णय लिया गया था,संचालन समिति का कार्यकाल १ वर्ष रखा गया था जिसे बाद की बैठकों कें बढाकर २ वर्ष कर दिया गया| २ वर्ष पूरे होने पर परिषद् का आयोजन १३-१५ जून २०१४ को करजरा,गया(बिहार) में करना सुनिश्चित किया गया है| साथ ही २ दिवसीय राष्ट्रीय युवा संस्कार शिविर का आयोजन भी किया जा रहा है |
      संपूर्ण क्रांति अवधारणा के तहत हम जिस प्रकार के व्यवस्था परिवर्तन के बारे में सोचते हैं उसमें सामाजिक, आर्थिक बदलाव से ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव है | दरसल संपूर्ण क्रांति अवधारणा के सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य ही सामाजिक-आर्थिक बदलाव की बुनियाद बनेगें| इस नाते व्यवस्था परिवर्तन के आन्दोलन में जुटने वाले साथियों के मन में सामाजिक-आर्थिक मुद्दों की स्पष्टता के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों की स्पष्टता भी ज़रुरी है|
हमारी अपेक्षा है की आप इस युवा संस्कार शिविर व् परिषद् में ज़रूर शामिल हों और व्यवस्था परिवर्तन के इस अभियान के भागीदार बनें|
धन्यवाद |
परिषद् व् युवा संस्कार शिविर
दिनांक : 13-14-15 जून 2014
स्थान  : करजरा, बोधगया (बिहार)                          
निवेदक

सुशान्त 
                                                         संयोजक – केंद्रीय संचालन समिति 
                                                         छात्र युवा संघर्ष वाहिनी

संपर्क : सुशान्त (09026742261), कुमार दिलीप (09504141047), वरुण ( 09935504812)

Wednesday, 16 April 2014

युवा सम्मेलन की रिपोर्ट



समतामूलक समाज बनाने हेतु और सामाजिक कार्यों को गति देने के लिए दो दिवसीय सम्मेलन 20-21 मार्च 2014 को निताई सिंह स्मृति भवन बेलटांड़,पटमदा में संपन्न हुई।
      ज्ञात हो कि पिछले कई वर्षों से छात्र युवा संघर्ष वाहिनी ने समतामूलक समाज बनाने के लिए तथा शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ एवं गुणवत्तापूर्ण समान शिक्षा के लिए जन चेतना कार्यक्रम चलाते आ रही है। इन सभी आयामों पर चर्चा करने के लिए सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय के रूप में समतामूलक समाज, स्त्री-पुरुष विषमता और आज की परिस्थिति में युवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। साथ में क्रान्ति गीतों का प्रशिक्षण दिया गया।
      संगठन का परिचय देते हुए कुमार दिलीप ने कहा कि सबसे पहले अपने आप में बदलाव लाना ही क्रान्ति है। समतामूलक समाज बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसे करने के लिए दृढ़ संकल्प की जरूरत है। जसवा के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद अंजुम ने कहा कि समाज में जो भी गतिविधियां चलती है, उसमें कानून का राज चलता है यह केवल सिद्धांत में है। मनुष्य-मनुष्य में भिन्नता है लेकिन मान्यता और अधिकार में समान अधिकार है। अपने विचार, व्यवहार, आचरण और समाज के सभी जगहों पर परिवर्तन लाने का काम करना है।
      सम्मेलन के दूसरे दिन के पहले सत्र में सी.जी. नेट के राष्ट्रीय रिपोर्टर सुनिल ने सी.जी. नेट संबंधित जानकारियां दी। सी.जी. नेट का उपयोग- इस नं0- 08050068000 पर मिस कॉल करना है और कम्प्युटर आवाज के अनुसार बटन दबाना है। इससे आप खबर सुन सकते हैं और अपना समाचार रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।
      दूसरे सत्र में जसवा के मंथन ने कहा कि स्त्री-पुरुष में प्रकृति के अनुसार आकार में भिन्नता है। मान्यता और अधिकार में समान अधिकार है। वजन उठाने के मामले में पुरुष आगे हो सकते हैं लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो केवल स्त्री ही कर सकती है, पुरुष नहीं। स्त्री को हीन दृष्टि से नहीं देखना है, उन्हें समान अधिकार देना है। झारखंड मुक्ति वाहिनी के कपूर बागी ने अपने संघर्ष का अनुभव सभी को बताया। सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि समाज परिवर्तन के लिए हमेशा तत्पर रहना है। समाज के सभी लोगों को त्याग करने के लिए सिखना होगा।
      सम्मेलन का संचालन विश्वनाथ और ईश्वर ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में गुरूपदो, सुदर्शन, प्रहलाद, कैलाश, संतोष कुमार, गुरवा, शंकर हेम्ब्रम, धंनजय, बैधनाथ, चैतन कुमार, विजय, सनातन, सोनाली प्रभा, श्वेता शशी, विनोद कुमार, प्रशांत कुमार, काजल कुमारी, गुरुचरण, खगेन, जयंती कुमारी और अंतस पलाश के अलावा जसवा के प्रांतीय संयोजक दिलीप कुमार, राजेश उपस्थित हुए।

विश्वनाथ
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी
पटमदा, पूर्वी सिंहभूम

Thursday, 20 March 2014

47 वां बाल मेला और साहित्य सम्मेलन की रिपोर्ट


                         उदयन कल्याण केंद्र, ’तिलुटिया आश्रम’

19600 में आचार्य श्री शुद्रोतम ने विभिन्न संप्रदाय के 11 परिवारों की महिलाओं व् पुरुषों को लेकर 7 विभाग बनाकर एक का-अपरेटिव फार्म समूह की स्थापना की थी | सभी ने अपने-अपने धर्म को बचाकर रखने के साथ-साथ मानवीय एकता समूह का निर्माण करने का संकल्प लिया था। सभी लोग,सभी धर्मों का पालन करते थे कभी कोई किसी भी धर्म के विरूद्ध नहीं रहते थे। इस समूह में सात विभाग खोले  गए जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, दूग्ध उत्पादन, पक्षि पालन, वाणिज्य और कला केंद्र विभाग शामिल किये गए थे| प्रत्येक विभाग में विभागिय विशेषज्ञ व्यक्ति को सचिव बनाया गया था और शिक्षा विभाग को डिग्री मुक्त बनाया गया था।
      19670 में आचार्य श्री शुद्रोत्तम के अनुयायीयों ने उनके विचार और आदर्श को प्रचार-प्रसार करने के लिए एक सांस्कृतिक मंच का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसमें छोटे बच्चों को परिपक्क करने हेतु बाल मेला एवं बड़ों को संघर्षशील और सम्वेदनशील बनाने के लिए साहित्य सम्मेलन आयोजित करने की योजना तैयार की गयी थी। सम्मेलन का मूल सारतत्व विचार-विमर्श रखा गया था। इस सांस्कृतिक मंच को आचार्य श्री शुद्रोत्तम के अनुयायी व स्वतंत्रता सेनानी और साहित्यिक व्यक्तित्व पुरनेन्दु प्रसाद भट्आचार्य ने शुरू किया था।
यह सांस्कृतिक मंच आज भी जीवित है। यहाँ हर वर्ष होली के त्योहार के अवसर पर कार्यक्रम किए जाते हैं। 2014 में 47वां बाल मेला और साहित्य सम्मेलन तिलुटीया आश्रम में सम्पन्न हुआ।
      कार्यक्रम के शुरूवात में वेद, बाईबल और कुरआन पाठ किया गया। विश्वनाथ मंडल ने वेद पाठ किया,सुभद्रा चटर्जी ने बाईबल पाठ किया और मौलाना रेजाउल इस्लाम ने कुरआन पाठ किया। इसके बाद बाल मेला के रूप में बाल प्रतियोगिता कार्यक्रम शुरू किया गया। प्रतियोगिता में चित्रांकन, रस्सी कूद, जिमनास्टिक,  गणित प्रतियोगिता, एक मिनट के प्रतियोगिता और अन्य कई प्रतियोगिताएं संपन्न हुई। इसके बाद होली के त्योहार के अवसर पर आश्रम के सभी सम्प्रदाय के लोग एवं आस-पास के अन्य लोगों ने रंग, अबीर और गुलाल से होली खेली।    
      पूरे कार्यक्रम में सभी जाति-धर्म के लोगों ने एक साथ भोजन पकाने का काम किया और एक साथ पंक्ति में बैठकर सभी ने भोजन किया। जिसमें कोई जाति-धर्म भेद का प्रश्न उत्पन्न नहीं हुआ।
      बाल मेला में बच्चों की कविता पाठ प्रतियोगिता, गीत प्रतियोगिता, नाच प्रतियोगिता एवं अन्य प्रतियोगिता भी हुई। और शाम के समय पुरस्कार वितरण किया गया।
      पुरस्कार वितरण के बाद नदिया-मुर्शीदाबाद से उपस्थित मेहेर चांद, दुलाली चित्रकार के नेतृत्व में कवि सम्मेलन किया गया। कवि सम्मेलन में गांव के अलावा आस पास के लोगों ने भी भाग लिया।
सम्मेलन के दूसरे दिन साहित्य सम्मेलन का आयोजन हुआ। सर्व प्रथम सुभद्रा चटर्जी के क्रान्ति गीत के साथ सम्मेलन आरम्भ हुआ। सम्मलेन में मुख्य अतिथि के रूप में प. बंगाल ग्रामीण बैंक के अवकाश प्राप्त चेयरमेन माननीय कल्याण चटर्जी उपस्थित थे। आचार्य श्री शुद्रोत्तम के साथी एवं भाई अब्दुल हालिम के अध्यक्षता में साहित्य सम्मेलन सम्पन्न हुआ। संचालन रंजीत मुखोपाध्याय और विशिष्ट अतिथि के रूप में श्यामली सेन उपस्थित हुईं। विषय प्रवेश कराते हुए आचार्य श्री शुद्रोत्तम के पुत्र श्री विश्वजीत कहा कि आश्रम शुरू होने के समय में जो उद्देश्य था, उस उद्देश्य को स्थापित करने का काम हमें करना होगा। जयदेव वार्ता पत्रिका के सम्पादक सुभाष कविराज ने कहा कि गरीब बच्चों को मुफ्त किताब वितरण एवं वृद्धा को सुविधा देने हेतु वृद्धा आश्रम बनाया जाए। आचार्य श्री शुद्रोत्तम के साथी एवं आश्रम कमिटी के सदस्य श्री समरेन्द्र ने कहा कि आचार्य श्री शुद्रोत्तम के जीवन दर्शन को पालन करना हमारा सबसे बड़ा काम हो सकता है।
      सामाजिक कार्यकर्ता मनिषा बनर्जी ने कहा कि आश्रम के विचार को प्रचार-प्रसार करना जरूरी है। आहाशन कमाल, फजलुल हक, रीना कविराज आदि ने अपना विचार रखा और छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी के कुमार दिलीप ने अपने संघर्ष का अनुभव बताते हुए कार्य योजना बनाने हेतु प्रेरित किया। कौशिक ने कहा कि साम्य, प्रेम और मैत्री शब्द से मुझे आश्रम ने आकर्षित किया है। जो हम सब लोगों को पालन करने की जरूरत है। श्यामली सेन ने कहा कि आश्रम के काम में मुझे जब भी बुलाया जाए मैं जरूर आउंगी और यथा संभव सहयोग करूंगी, आश्रम को आगे बढ़ाने में मैं हमेशा तत्पर्य रहुंगी। कल्याण चटर्जी ने कहा कि मैं आश्रम को आगे बढ़ाने हेतु हमेशा साथ रहुंगा। कोलकाता में कोई भी कार्यक्रम होने पर मैं अधिक साथ दे सकता हूं। आश्रम को ट्रस्टी एक्ट के तहत रेजिस्ट्रेशन किया जाय इसका भी प्रस्ताव आया। अध्यक्षीय भाषण के तौर पर अब्दुल हालिम अपना विचार में श्री शुद्रोत्तम के जीवन दर्शन में प्रकाश डाले और हम सभी को उनके दिये मार्ग में चलने को कहा। अंत में श्री सुरजीत ने सभी अतिथि को धन्यवाद देते हुए सभा को समाप्त की घोषणा की।
      सांस्कृतिक कार्यक्रम के तौर पर आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। साथ-साथ में हंडी फोड़, चम्मच दौड़, तीरंदाजी और तेल युक्त बांस में चढ़ने का खेल प्रतियोगिता किया गया। विश्व भारती शांतिनिकेतन के विद्यार्थियों ने एक छोटा नाटक प्रस्तुत किया। जिस नाटक का नाम था ‘हृदयपुर कोतो दूर’ इसके बाद रविन्द्र नृत्य नाटिका चंडालिका कार्यक्रम हुआ। इसके बाद मनसा मंगल कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
सभी कार्यक्रम के संचालन में श्री विश्वजीत ने मुख्य भूमिका निभाई।

Monday, 3 February 2014

विदेशी शिक्षा संस्था (प्रवेश और प्रचालन का विनियमन) विधेयक,2010 की आलोचना एवं सुझाव


केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विदेशी शिक्षा संस्था विधेयक, 2010 के वितरित प्रपत्र में लिखित उद्देश्य और कारणों के कथन में यह लिखा है कि “ 1) देश में अनेक विदेशी शिक्षा संस्थाएं काम कर रही है और उनमे से कुछ विद्यार्थियों को लुभाने और आकर्षित करने के विभिन्न अनाचारों में लगी हो सकती है |देश में सभी विदेशी शिक्षा संस्थाओं के प्रचालन पर विनियमन के लिए कोई व्यापक और प्रभावी नीति नहीं है |नीति या विनियमन शासन के अभाव में विदेशी शिक्षा संस्थाओं के प्रवर्तनो का सार्थक मूल्यांकन करना बहुत कठिन हो गया है और ऐसे सार्थक मूल्यांकन का अभाव वाणिज्यीकरण के अलावा विभिन्न अऋजु व्यवहारों के अंगीकरण का अवसर पैदा करता है |
2) वर्तमान में केवल अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने ‘भारत में तकनीकी शिक्षा देने वाले विदेशी विश्वविद्यालयों और संस्थाओं के प्रवेश और प्रचालन के लिए विनियम अधिसूचित किये है जो केवल ऐसी संस्थाओं को लागू होते है जो अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अधिनियम, 1987 के अंतर्गत आने वाली तकनीकी शिक्षा उपलब्ध करा रहे है’ |
3) सभी विदेशी शिक्षा संस्थाओं के प्रवेश और प्रचालन को विनियमित करने के लिए विधान का अधिनियम देश के भीतर उच्चतर शिक्षा के मानकों को बनाये रखने और साथ ही विद्यार्थियों के हित को संरक्षित करने और लोक हित में आवश्यक है |प्रस्तावित विधान का उद्देश्य भारत में उच्चतर शिक्षा या तकनीकी शिक्षा या किसी वृति का व्यवहार (जिसके अंतर्गत ऐसी संस्थाओं द्वारा डिग्री, डिप्लोमा या समतुल्य अहर्ताओं का दिया जाना है ) देने वाली या देने का आशय रखने वाली विदेशी शिक्षा संस्थाओं के प्रवेश और प्रचालन का विनियमन करने और उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक विषयों के लिए है |
इस विधेयक का अध्ययन करने के पश्चात यह बात कहीं से स्पष्ट नहीं हो रही है कि इस बिल का बनना क्यों इतना आवश्यक है? सिर्फ शिक्षा में विदेशी संस्थाओं के विनियमन के लिए या शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए? किस लिए यह कदम उठाया जा रहा है? अगर बात शिक्षा के स्तर में सुधार की है तो यह विधेयक कहीं भी सुधार की दिशा में आगे बढते हुए नहीं दिख रहा है और अगर विधेयक का उद्देश्य वास्तव  में सुधार करने का है(जो थोडा-बहुत इसमें लिखा है ) तो विधेयक में निम्नलिखित बातों का कोई ज़िक्र न होना खतरे का संकेत है |
Ø    विदेशी संस्थाओं के परिसर को स्थापित करने के लिए अधिकतम कितनी भूमि अधिगृहित की जा  सकेगी, इसका ज़िक्र नहीं किया गया है| इससे अनावश्यक तौर पर अधिक भूमि अधिग्रहण की संभावना ही बनती है|
Ø    विदेशी संस्थाओं में पढाई के लिए फीस की सीमा निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है|
Ø    इन विदेशी संस्थाओं की शिक्षा की गुणवत्ता जांचने और बनाये रखने का कोई उल्लेख नहीं है |
Ø    गरीबों को फीस में छूट का कोई प्रावधान नहीं है |
Ø    शिक्षकों की भर्ती और उनकी गुणवत्ता के कोई मानक नहीं तय किये गए हैं|
Ø    विदेशी शिक्षण संस्थाएं किस स्तर की होंगी इसका उल्लेख नहीं है |
Ø    विदेशी शिक्षा संस्थाएं शिक्षा में खोज,अनुसन्धान एवं विकास पर केंद्रित होंगी इस दिशा का कोई उल्लेख नहीं किया गया है |

      छात्र युवा संघर्ष वाहिनी विदेशी शिक्षण संस्थाओं या किसी भी अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान का सैधांतिक रूप से विरोधी नहीं है लेकिन इस विधेयक को उपरोक्त प्रावधानों के न होने के कारण ख़ारिज करती है| यह विधेयक शिक्षा की गुणवत्ता,शोध एवं विकास की गारंटी तो नहीं करता; भूमि लूट,शिक्षा में अंधाधुंध व्यापारीकरण के परिघटना पर रोक का भरोसा भी नहीं देता |    
 शिक्षा के सम्बन्ध में किसी भी अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान का स्वरुप इन रूपों में लागू होना चाहिए  -
Ø  अगर बिल की आवश्यकता लगती ही है तो उसे समाज में छात्र-छात्राओं,शिक्षकों,शिक्षाविदों, सीनेट,सिंडिकेट,छात्र संघों में बहस चलाने के बाद प्रभारी समितियों के आधार पर पुनर्लिखित कर संसद में पेश किया जाना चाहिए |
Ø  फीस की सीमा तय की जानी चाहिए व उस पर लगाम लगाने के प्रभावी प्रावधान किये जाने चाहिए |
Ø  गरीबों को 25% आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए |
Ø  शिक्षकों के नियुक्ति की प्रक्रिया व मानक का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए |
Ø  विदेशी शिक्षण संस्थाओं को 20 साल के अनुभव के बजाये विधेयक में सरकारी शिक्षण संस्थाओं व विश्व रैंकिंग में 200 तक के दर्जे वाले संस्थानों को ही भारत में संस्थान खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए |
Ø  विदेशी संस्थाओं को खोज,विकास एवं अनुसंधानों के विकास के लिए प्रतिबद्ध एवं केंद्रित होने की शर्त पर भारत में संस्थान खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए |

Sunday, 5 January 2014

आमंत्रण




सम्मानीय श्री मित्र
स्नेह और सम्मान के साथ अभिवादन 
सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में संलग्न आप सभी युवा मित्र को हम प्रबोधन पर्व का महत्वपूर्ण और निर्णायक साथी मानते हैं। अतः हम सभी युवा मित्र परस्पर मैत्री और अपनत्व के भाव से विकसति हो सके और समाज हितों को ध्यान में रखकर सकारात्मक योगदान दे सके| इस दृष्टी से दिनांक 24, 25, 26 जनवरी 2014 को निवेदिता निलयम युवा अध्ययन केन्द्र, साटोडा, वर्धा एवं गांधी स्मृति दर्शन समिति, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में सह-चिंतन शिविर का आयोजन कर रही है। जिसमें आप सभी विभिन्न युवा संगठनों के साथी-मित्रों से सविनय आग्रह है कि इस शिविर में सहभागी होकर हम सह-चिंतन के आधार पर सामाजिक उद्देश्यों एवं स्वयं की भूमिका को नये आयाम देने के लिए अग्रसर होवें। इस पत्र के साथ शिविर के लिए यह आमंत्रण सविनय प्रस्तुत है। कृपया स्वीकार कर अभिस्विकृति प्रदान करने का कष्ट करें। 
शिविर दिनांक: 24, 25, 26 जनवरी 2014
शिविर स्थान: निवेदिता निलयम युवा अध्ययन केन्द्र, साटोडा, वर्धा, महाराष्ट्र।
 


निवेदक
दिपेन्द्र अविनाष  (गांधी स्मृति दर्शन समिति, नई दिल्ली)
कुमार दिलिप  (छात्र युवा संघर्ष वाहिनी, झारखंड)
मोरेश्वर येवतकर  (सर्वोदय युवा वाहिणी, वर्धा)
सागर कछवा  (निवेदिता निलयम युवा अध्ययन केन्द्र, वर्धा)